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रॉयल सिटी कॉलोनी घिरी  विवादों में- प्लाट लेने वालों हो जाओ सावधान।







कहीं नए बनाने के चक्कर में पुराना बेचकर ऊपर ना लगाना पड़ जाए-: नया प्लॉट लेने से पहले सावधान

फाजिलका-(दलीप दत्त)-स्थानीय अबोहर रोड पर चुंगी रोड पर एमसी कालोनी के निकट बनाई गई रियल एस्टेट रायल सिटी पूरी तरह बसने से पहले ही विवादों में आ गई है। कालोनी के लिए जगह बेचने वाले परिवारों ने डेवलपर्स पर बिना रजिस्ट्री करवाए हेराफेरी से लोगों को उनकी मालिकी वाले प्लाट बेचने और रजिस्ट्री करवाने में आनाकानी करने के आरोप लगाए हैं। इसके चलते अब जमीन विक्रेताओं ने तय करार के अनुसार रजिस्ट्री न करवाने के चलते अदालत का दरवाजा खटखटाने और पुलिस कार्रवाई कर मन बनाया है जिसके चलते दर्जनों प्लाट खरीददारों के अदालत के चक्कर काटने की नौबत आ सकती है।

 

 

कालोनी के लिए जगह बेचने का सौदा करने वाले सुरेश कुमार, अनिल कुमार, अभिनंदन, अभिषेक, बजरंग लाल गुप्ता व सौरव गुप्ता ने आरोप लगाया कि श्री मुक्तसर साहिब की वेरा डेलवपर्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों ने ‘रायल सिटी’ के नाम से कालोनी विकसित करने के लिए उनके साथ कुल 89.6 कनाल जमीन का सौदा किया था। उसमें से आरोपियों ने महज 32 कनाल की रजिस्ट्री करवाई है जबकि शेष जमीन की रजिस्ट्री करवाने में आनाकानी कर रहे हैं। वह तो निर्धारित तिथियों पर रजिस्ट्री करवाने के लिए रजिस्ट्रार के समक्ष पेश भी हो चुके हैं। हर बार कालोनी डेवलपर्स उनसे समय की मांग कर लेते हैं।

लेकिन अब उन्हें पता है कि जिस जगह की रजिस्ट्री नहीं हुई, उसमें भी हेराफोरी से डेवलपर्स खुद को हिस्सेदार शो करके लोगों को प्लाट की रजिस्ट्री करवाकर दे रहे हैं। इसके चलते इस गोरखधंधे में प्लाट खरीददार भी संलिप्त हो रहे हैं, जो आगामी दिनों में शुरू होने वाली अदालती कार्रवाई में फंस सकते हैं। विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने विश्वास के चलते डेवलपर्स को पूरी जमीन की रजिस्ट्री से पहले ही चारदीवारी करवाने दी लेकिन डेवलपर्स विश्वासघात कर शेष जमीन की रजिस्ट्री करवाने में आनाकानी कर रहे हैं, जिसके चलते उनसे करोड़ों रुपए की ठगी की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से करने के साथ साथ अपनी गैर रजिस्ट्री शुदा जमीन पर बेचे गए प्लाटों को खाली करवाने के लिए अदालती कार्रवाई का मन बना लिया है।

-जमीन मालिकों ने कालोनी डेलवपर्स के खिलाफ बनाया अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन

रायल सिटी में बिना रजिस्ट्री करवाए हेराफेरी से प्लाट बेचने का मामला केवल विक्रेताओं के साथ धोखााड़ी का नहीं है बल्कि उसमें प्लाट खरीदने वालों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इस मामले में न केवल बिना रजिस्ट्री वाली जगह से प्लाट खरीदने वाले 12 खरीदारों को अदालती कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, वहीं कालोनी की मंजूरी लेने के लिए जमीन विक्रेताओं के फर्जी दस्तावेज बनवाने के चलते पूरी कालोनी की मंजूरी भी रद हो सकती है।

एमडी एवं संचालक राकेश कक्कड़ 

-इस मामले पर क्या कहना है एमडीएफ संचालक राकेश कक्कड़ का

 इस बारे में वेरा डेवलपर्स के एमडी एवं संचालक राकेश कक्कड़ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन पर लगाए आरोपों जमीन बेचने वाले गुप्ता परिवार ने ये तो बता दिया कि रजिस्ट्री नहीं करवाई जा रही लेकिन ये नहीं बता रहे कि तयशुदा सारी रकम की अदायगी वेरा डेवलपर्स ने कर दी है। अब गुप्ता परिवार ने तय सौदे के अनुसार प्लाट के रूप में बिकने से बच गई पार्कों और सडक़ों की जमीन को नगर कौंसिल को ट्रांसफर करना है जोकि कालोनी बसाने के नियमों के अनुसार पहले ही नगर कौंसिल फाजिल्का को हैंड ओवर की जा चुकी है। कक्कड़ ने ये भी बताया कि वेरा डेवलपर्स ने अब केवल 10 कनाल जमीन की रजिस्ट्री ही गुप्ता परिवार से करवानी है जोकि कोविड-19 के चलते थमे हर कारोबार की वजह से नहीं हो पाई। वेरा डेवलपर्स ने इसके लिए बाकायदा रजिस्ट्रार के समक्ष पेश होकर समय भी मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 46 कनाल का विशाल भूखंड जोकि नगर कौंसिल को ट्रांसफर किया जाना है, उसे लेकर जमीन विक्रेताओं की नीयत में खोट आ गया है, इसके चलते ही वह उन पर आरोप लगा रहे हैं। जबकि उनके आरोपों से ज्यादा सच्चाई इस बात में है कि वेरा डेवलपर्स ने गुप्ता परिवार द्वारा रजिस्ट्री करवाने में की जा रही देरी के खिलाफ न केवल उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है बल्कि अदालत में केस भी दायर कर दिया है और इ ओ(EO) विंग में भी शिकायत दर्ज कराई हुई है।

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