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फाजिल्का में शहद ऊधम सिंह पार्क में क्षेत्रवासियों ने श्रद्धापूर्वक मनाया शहीद ऊधम सिंह का शहीदी दिवस







 

फाजिलका -(दलीप दत्त)-शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस मौके आज फाजिल्का में उनके पैरोकारों ने शहीद ऊधम सिंह पार्क में शहीदी दिवस मनाया। इस मौके पर प्रधान हैप्पी कंबोज, मखन लाल, भगवान दास, केवल चौधरी, हरविंदर सामा, शुभम जोसन, बलदेव राज, सुभाष कंबोज, कृष्ण लाल कंबोज, हरचंद, पूर्ण चंद बट्टी, शाम लाल, आप नेता अरुण वधवा, रूपेश बांसल, सुखविंदर थिंद ने बताया कि भारतीय इतिहास के अनेक योद्धाओं व क्रांतिकारियों की शहादत का गवाह रहा है। उनमें से एक नाम शहीद-ए-आजम ऊधम सिंह का भी है, जिन्होंने आज के ही दिन 31 जुलाई 1940 में फांसी के फंदे को हंसते हंसते चूमा और देश के लिए कुर्बान हो गए थे। वह एक ऐसा वीर योद्धा था, जिसने 13 अप्रैल 1919 के जलियांवाला हत्याकांड का बदला लेने का प्रण लिया था और उसे पूरा भी किया। सरकार ऊधम सिंह का जनम 26 दिसंबर 1899 में पंजाब के संगरूर जिले के गांव सुनाम में हुआ था। उनके पिता का नाम टहल सिंह ज[1]मू व माता का नाम नारायण कौर था। इनका बचपन का नाम शेर सिंह था। इनकी माता का इनके जन्म के दो साल बाद 1901 और पिता 8 साल बाद 1907 में देहांत हो गया था। सिर्फ आठ साल की उम्र में ऊधम सिंह अनाथ हो गए थे।

  

उनके और उनके बड़े भाई मुकता सिंह को अमृतसर के खालसा अनाथ घर में दाखिल करवाया गया। कुछ साल बाद इनके भाई की भी मौत हो गई। ऊधम सिंह ने 1918 में मैट्रिक पास की और 1919 में यहां से चले गए। साथ ही उन्होंने कहा कि जब 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में 20 हजार प्रदर्शनकारी अंग्रेजों के रोलेट एट के विरोध में इकट्ठे हुए तो उस वक्त ऊधम सिंह उस विशाल सभा के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे थे। इनकी आंखों के सामने अंग्रेजों ने निहत्थे भारतीयों पर गोलियां चलाईं और सैकड़ों लोगों को मार दिया। इस घटना ने ऊंधम सिंह को झकझोर कर रख दिया और उन्होंने अंग्रेजों से इसका बदला लेने का फैसला किया। लोगों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस घटना के लिए उन्होंने जनरल माइकल ओ डायर, जो उस वक्त पंजाब प्रांत के गवर्नर थे, उसे जिम्मेवार ठहराया। क्योंकि उसने 90 हजार सिपाहियों को साथ लेकर जलियांवाला बाग को हर रिफ से घेर लिया था और निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई थीं। उन्होंने कहा कि ऊधम सिंह को भारतीयों की मौत का बदला लेने का मौका 1940 में मिला और 13 मार्च 1940 में रायल सेेंट्रल एशियन सोसायटी लंदन के कैकस्टन हाल में बैठक थी, जहां  इकल ओडवायर ने भी भाषण देना था। ऊधम सिंह उस दिन वहां पहुंचे और अपने रिवाल्वर को किताब में छिपा लिया। मौका मिलते ही उन्होंने माइकल ओडवायर पर गोलियां चला दीं, जिससे उसकी मौत हो गई। ऊधम सिंह उस जगह से भागे नहीं बल्कि खुद को गिरफ्तार करवा लिया। वक्ताओं ने कहा कि शहीद ऊधम सिंह पर मुकदमा चलाया गया और 4 जून 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई। इसके चलते आज फाजिल्का में शहीदों को ह्रश्वयार करने वालों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि भेंट की।

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