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फाजिल्का के निवासी रमेश चंद्र ने 450 क्विंटल पराली सरकारी गौशाला में की दान







फाजिलका-(दलीप दत्त)-अपने आस-पास शुद्ध और बीमारियों से मुक्त वातावरण धान की पराली को आग न लगा कर बल्कि इस का अलग-अलग ढंगों के द्वारा प्रबंधन करके ही सृजा की जा सकता है। धान की पराली को आग लगाने से जहां वातावरण तो प्रदूषित होता ही है वहीं कई घातक बीमारियां भी पैदा होती हैं। उक्त उद्गार अडिशनल डिप्टी कमिश्नर (वी) नवल राम ने  व्यक्त करते कहा कि पराली को आग न लगा कर इस का सरकार द्वारा दर्शाई अलग -अलग विधियों के द्वारा निपटारा किया जाए। अडिशनल डिप्टी कमिश्नर ने फाजिल्का के निवासी रमेश चंद्र की प्रशंसा करते कहा कि उस द्वारा 450 क्विंटल पराली सलेमशाह में चल रही सरकारी गौशाला में दान दी गई है। उन्होंने बताया कि गौशाला में बेसहारा पशुओं के लिए यह पराली दान के तौर पर दी गई है। उन्होंने बताया कि निवासी द्वारा पराली को आग लगाने की बजाय पराली का गौशाला में दान करना प्रशंसनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि निवासी द्वारा आगे भी पराली गौशाला को दान के तौर पर दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह पराली गउशाला में केयर टेकर की देख-रेख में उतारी जा रही है। अडिशनल डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि पूरा देश करोना महामारी की चपेट में आया हुआ है और कई लोग इस घातक बीमारी के साथ मर भी चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम कोरोना महामारी के साथ तो जूझ ही रहे हैं और पराली को आग लगाने से वातावरण ओर प्रदूषित हो जाएगा और ओर बीमारियां भी लगने का डर पैदा हो जाएगा। इस के अंतर्गत उन्होंने अपील करते कहा कि रमेश चंद्र से शिक्षा लेते हुए और निवासी भी धान की पराली को गौशाला में दान करें या पराली को आग न लगा कर अलग-अलग विधियों के द्वारा इस का निपटारा किया जाए जिस के साथ वातावरण हरा-भरा और शुद्ध रह सके।

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