डा. रिणवा के शिअद में जाने से बदले राजनीतिक समीकरण 

फाजिलका-(दलीप दत्त)- पिछले काफी समय से कांग्रेस की गतिविधियों से दूर रहने के कारण लगातार अटकलें लगाई जा रही थी कि पूर्व विधायक डा. महिद्र रिणवा पार्टी को छोड़ सकते हैं। वीरवार को इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए डा. महिद्र रिणवा ने कांग्रेस पार्टी का दामन छोड़ शिअद को ज्वाइन कर लिया है। कुछ समय पहले कांग्रेस पार्टी में पूर्व मंत्री रहे हंसराज जोसन के बाद अब डा. महिद्र रिणवा के शिअद में जाने से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं और लगातार अकाली दल की स्थिति मजबूत होती जा रही है। डा. महिद्र रिणवा 1992 का चुनाव लड़ने से पहले फाजिल्का के सिविल अस्पताल में बतौर डाक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इसके बाद उन्होंने साल 1992 में आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और भाजपा के उम्मीदवार सोहन लाल को हराकर जीत हासिल की। हालांकि इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए, लेकिन साल 1997 के चुनाव में कांग्रेस के पद पर टिकट मांगने पर उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने पार्टी को छोड़ते हुए एक बार फिर से आजाद उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि वह भाजपा के सुरजीत कुमार ज्याणी से हार गए, लेकिन वह ज्याणी के बाद दूसरे स्थान यानि रनरअप के रूप में रहे। कांग्रेस को 1997 में एक बार फिर से मिली हार के चलते साल 2001 में कांग्रेस ने ना केवल डा. महिद्र रिणवा को एक बार फिर से पार्टी में शामिल किया, बल्कि उन्होंने 2002 के चुनाव के लिए टिकट भी थमाई। पार्टी हाईकमान की आशाओं पर खरा उतरते हुए डा. महिद्र रिणवा ने भाजपा के सुरजीत ज्याणी को हराकर जीत हासिल की। साल 2007 में हुए चुनाव में कांग्रेस की टिकट फिर से मिली, लेकिन इस बार भाजपा के सुरजीत ज्याणी ने उन्हें एक बार फिर से हराया। इसके बाद साल 2012 में भी वह कांग्रेस पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हुई। साल 2017 में भी डा. रिणवा ने कांग्रेस से टिकट की मांग की, लेकिन कांग्रेस ने इस बार टिकट युवा दविद्र सिंह घुबाया को सौंपी, जिन्होंने भाजपा के सुरजीत ज्याणी को हराकर जीत हासिल की। तभी से डा. रिणवा पार्टी की गतिविधियों से दूर चल रहे थे।

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