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माता-पिता व गुरू ऋण से मुक्त होना मानव के लिए कठिन कार्य- स्वामी कमलानंद जी महाराज







Parents and teachers free from debt. Difficult task for human beings Swami Kamalanand Ji Maharaj

फाजिलका-(दलीप दत्त)-श्री बालाजी धाम फाजिल्का के 12वें वार्षिक उत्सव के उपलक्ष्य में चल रही 15 दिवसीय राम कथा के चतुर्थ दिन का पूजन समाजसेवी सुभाष बांसल व उनके पारिवारिक सदस्यों द्वारा पूजन करवाकर किया गया। इस मौके उन्होंने महाराज जी को माल्यार्पण व तिलक लगाया और आज के प्रसाद की सेवा भी उनके द्वारा की गई। इस अवसर पर हरिद्वार से आए महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि जी महाराज ने उपस्थित जन समूह को बताया कि ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद परमपिता परमात्मा की भाव भावित प्रार्थना हर इंसान को जरूर करनी चाहिए। प्रार्थना इतनी भावुकता में होनी चाहिए कि सारा दिन मन मैं सुकून बना रहे।
उन्होंने कहा की प्रार्थना केवल अपने लिए ही न होकर सकल सृष्टि के प्राणी मात्र की सुख शांति के लिए होनी चाहिए। प्रार्थना मानव मात्र के लिए आधार है संभल है इसको जीवन का मार्मिक अंग बनाना जरूरी है। महाराज जी ने बताया की राम राज्य में चारों वर्ण, और चारो आश्रम के लोग सुकून का जीवन जीते थे। आपस में प्रेम और प्यार हर मानव में लबालब भरा रहता था। श्री राम राज्य में केवल मानव मात्र नहीं 8400000 योनियाँ प्रसन्नता से जीवन यापन करती थी।
महाराज ने बताया कि माता पिता की भक्ति श्रवण कुमार से प्रेरणा लेकर करनी चाहिए, और गुरु की सेवा एकलव्य से प्रेरित होकर करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि माता-पिता कभी संतान का बुरा नहीं चाहते, इसलिए उनके विचारों की पूरी तरह कदर करनी चाहिये। मात्री ऋण,पितृ ऋण एवं गुरू ऋण से मुक्त होना मानव के लिए कठिन कार्य है। इसलिए यत्न करें कि इन तीनों का मान यथा योग्य बना रहे यही पुत्र और शिष्य का धर्म है।
महाराज जी ने बताया कि हजारों अनर्थौ को रोकने का अमोघ उपाय केवल मौन है। मीठा बोलना श्रेष्ठ कला है, लेकिन मौन उससे भी कहीं ऊंची कला है। उन्होंने आगे बताया कि जीवन में दुख और सुख का द्वंद चलता ही रहता है। माता जानकी जी का जिक्र करते हुए बताया कि युग हमेशा जानकी जी का ऋणी रहेगा। यदि जानकी जी ने कृपा नहीं की होती तो जगत को राम कथा सुनने को नहीं मिलती। सृष्टि की समग्र सहनशीलता के सभी अंग बना दिए जाएं तो उसे ही लोग जानकी जी कहेंगे। धरती की पुत्री ने इतना धैर्य धारण किया कि सहन करते-करते अंत में धरती में ही समा गई। आज की मेरी माताएं बहने अपने दु;ख से जानकी जी के दु;खों की तुलना करके देखेंगी तो अपना दु;ख भूल जाएंगी। जानकी जी के दु:ख के आगे हमारे दु:ख की कोई तुलना नहीं। माता जानकी जी ने चाहे जीवन में कितना भी दु;ख झेला परंतु कभी क्रोध नहीं किया, उस दु:ख को लोगों के आगे प्रकट नहीं होने दिया।
दुख निवारण श्री बालाजी धाम के महासचिव नरेश जुनेजा ने बताया कि कथा के उपरांत आज की आरती मुख्य यजमान के अलावा मंदिर कमेटी के सदस्यों द्वारा करवाई गई। उन्होंने कहा कि श्री राम कथा 13 फरवरी तक चलेगी तथा 14 से 16 फरवरी को पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा हरिद्वार के आचार्य महामंडलेश्वर ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के माध्यम से फाजिल्का निवासियों को कृतार्थ करेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं व नगर-निवासियों से मंदिर के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन को संचालन करने में महावीर प्रसाद मोदी, अश्वनी बांसल, नरेश अरोड़ा, ओम प्रकाश दावड़ा, रेशम लाल असीजा, एसडीएम जय लाल, किरण चौपड़ा, लवली मेहरा, अन्नू, विजय आर्य व प्रैस सचिव सुधीर सिडाना की ओर से सहयोग दिया जा रहा है।

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