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छत गिरने से युवा डा. निखिल त्यागी की मौत







Krishna Dharth Dispensary succumbed to painful death

 

-इस घटना का जिम्मेदार कौन
-60 साल से ऊपर थी पुरानी बिल्डिंग चल रहा था औषधालय
 -घंटा घर के नजदीक एक पुरानी बिल्डिंग में चल रहा है कैफे

फाजिलका-(दलीप दत्त)-स्थानीय घास मंडी में स्थित श्री कृष्ण धमार्थ औषधालय में बतौर फिजियोथैरिपिस्ट अपनी सेवाएं दे रहें व औषधालय के ही एक कमरे में रहने वाले युवा डाक्टर  निखिल त्यागी की औषधालय की छत गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। वह साल 2011 से फाजिल्का में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हादसे में उनकी मौत की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रात्रि लगभग 10 बजे के करीब लोगों ने जोरदार आवाज सुनी तो लोग घरों से बाहर निकलकर आये तो धमार्थ कृष्ण औषधालय से उठ रही धुल से पता चला कि औषधालय की छत गिरी है।

लोगों ने मलबे में किसी के दबे होने की खोज शुरू की तो पता चला कि डा. निखिल अंदर हो सकते है जो कि इस इमारत में रहते है। इस घटना की सूचना मिलते ही डीएचपी फाजिल्का जगदीश कुमार एसएचओ सिटी नवदीप सिंह भट्टी और एंबुलेंस तुरंत मौके पर पहुंचे और लगभग पौने घंटे के मशकत के बाद उन्हें मलबे से निकाला गया और एंबुलेंस के जरिया सिविल अस्पताल ले जाया गया। जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बता दें कि मूल रूप से गाजियाबाद निवासी डा.निखिल त्यागी यहां औषधालय में बेहतरीन सेवाएं प्रदान कर रहे थे वहीं उनके हाथ की शफा से प्रभावित होकर बढ़ रहे उनके मरीजों की सं या के चलते उन्होंने अपना एक  क्लीनिक फिरनी रोड़ पर त्यागी वेलनेस सेंटर के नाम से भी खोल लिया था, लेकिन एकाएक उनकी मोत की खबर ने ना केवल उनके मरीजों बल्कि उन्हें जानने वाले हर किसी को आहत कर दिया है। इस हादसे में जहां क्षेत्र के काबिल फिजियोथैरिपिस्ट छीन लिया वहीं क्षेत्र में असुरक्षित इमारतों को लेकर प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्यवाही पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। इस हादसे में केवल संबंधित संस्था को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता बल्कि असुरक्षित इमारतों को नष्ट करवाने के लिये जि म्मेदार विभाग व उनके अधिकारियों को भी जि म्मेदार मानते हुये  इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिये ताकि भविष्य में डा क्टर त्यागी जैसी प्रतिभाओं को ऐसे जान ना गंवानी पड़े। डा. त्यागी के साथ उनके छोटे भाई निशांत भी इसी इमारत में उनके साथ रहते है लेकिन किसी कार्य से बाजार गये होने के चलते वह इस हादसे का शिकार होने से बच गये। जबकि डा. निखिल त्यागी को असुरक्षित इमारत में रहने का खमियाजा अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

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