क्या पूर्व डी.जी.पी. सैनी का मामला-अकाली दल के लिए घातक सिद्ध होने वाला है ?

बलवंत मुलतानी के साथ-साथ चल रहा है-बरगाड़ी और बहबल कलां

एस.ए.एस. नगर-(पंजाब वार्ता ब्यूरो)-मोहाली के मटौर थाने में दर्ज हुए पूर्व डी.जी.पी. पंजाब सुमेध सिंह सैनी का बहुचर्चित मामला, जिस में आई.पी.सी. की धारा 302 शामिल किए जाने के बाद सैनी की मुश्किलें एक के बाद एक बढ़तीं गई हैं, सुप्रीम कोर्ट तक उसकी जमानत खारिज कर चुकी है।

सिर्फ यही मामला नहीं बल्कि बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सरूपों की 12 अक्तूबर 2015 को बरगाड़ी गांव में हुई बेअदबी के बाद 14 अक्तूबर को बहबल कलां में सिक्ख नौजवानों पर हुई फायरिंग के समय यही सुमेध सिंह सैनी पंजाब का डी.जी.पी. थे। इस मामले में ऐवेस.आई.टी. की तरफ से सैनी का नाम सामने लाने के बाद अब अकाली दल भी दोबारा कसूती हालत में फंसा दिखाई दे रहा है। इसकी वजह यह है कि 2012 में जब दोबारा पंजाब में अकाली दल की सरकार सत्ता में आई तो सुमेध सिंह सैनी को डी.जी.पी. के ओहदे के साथ नवाजा गया। उस समय पंजाब ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिक्ख जत्थेबंदियों ने अकाली दल के इस फैसले की निंदा करते कहा था कि सुमेध सिंह सैनी का नाम पंजाब में मानवीय अधिकारों का उल्लंघन करने और मिलिटैंसी के नाम पर सिक्ख नौजवानों पर अत्याचारों के लिए लिया जाता है। बड़ी बात यह भी थी कि खुद अकाली दल ही अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहता रहा है कि वह अदिवाद दौरान पुलिस ज्यादतियां करने वालों विरुद्ध कार्यवाही करेगा। यही कारण रहा कि बरगाड़ी कांड अकाली दल पर इस कद्र हावी हुआ कि 2017 विधान सभा चुनाव में अकाली दल की हवा निकल गई और पंजाब में लगातार 10 साल राज करने वाली पार्टी अपने पूरे इतिहास में सब से कम सीटें हासिल कर के तीसरे स्थान पर गई और नई पार्टी (आम आदमी पार्टी) इस से अधिक सीटें जीत गई। सैनी के साथ साथ अकाली दल की मुश्किलें बरगाड़ी और बहबल कला के कारण बढ़ी हैं। अब जब कि पंजाब की विधान सभा चुनाव में सिर्फ डेढ़ साल का समय ही रह गया है तो इस मामले की गर्मी अपनी चरम सीमा पर पहुंचती दिखाई दे रही है। साफ तौर पर यदि उस समय के पुलिस उच्च अधिकारी इसके लपेटे में आते हैं तो अकाली दल भी इस गर्मी की तपिश से बचा नहीं रह सकेगा। सैनी के साथ-साथ उस समय के आई.जी. उमरानंगल का नाम भी एस.आई.टी. ने प्रमुखता की तरफ से लिया है। उमरानंगल की तो उस समय निलंबन भी हुई थी। इस एस.आई.टी. का नेतृत्व कुंवर विजय कुमार सिंह कर रहे हैं। 

राजनैतिक माहिर यह कहते हैं कि अकाली दल इस मामले में बिल्कुल खामोश है जबकि सैनी अभी तक फरार है और उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट भी जारी हो गए हैं। अकाली दल (अ) और अन्य सिक्ख जत्थेबंदियाँ सैनी को गिरफ्तार करवाने वाली के लिए इनाम का ऐलान कर रही हैं। इस के साथ अकाली दल का अन्य राजनैतिक नुक्सान ओर रहा है और जो भी भरपायी अकाली दल ने साढ़े तीन सालों में से था, वह इस केस के कारण खत्म हो सकती है। राजनैतिक माहिर यह भी कहते हैं कि इस में कोई शक नहीं कि पंजाब के लोगों में कांग्रेस विरुद्ध एंटी इंकम्बैंसी फैक्टर है परन्तु साथ ही अकाली दल विरुद्ध भी बरगाड़ी के नाम पर एक बड़ा एंटी इंकम्बैंसी फैक्टर तैयार है। इंतजार सिर्फ इस केस के फैसले का है

 

 

 

 

   

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