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सरकारी अस्पताल फाजिल्का मे कार्यरत नर्स पर लगे पर आरोपियों को बचाने के आरोप।







-महिला नर्स ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से नकारा मेरा नहीं है कुछ लेना देना।

-इस सारी घटना की जानकारी पंजाब के हेल्थ मिनिस्टर तक पहुंचा दी गई है और उन्होंने आज मंगलवार पूरी घटना का ब्यौरा मांगा है 

फाजिलका-(दलीप दत्त)-फाजिल्का का सरकारी अस्पताल हमेशा किसी ना किसी बात को लेकर चर्चा में रहता है ऐसा ही एक मामला बीते दिन सामने आया कि किस तरह एक सरकारी हस्पताल में कार्यरत महिला नर्स ने अपने पिता व भाई को जेल जाने से रोकने के लिए कैसे पुलिस को चक्र में डाला गया । सूत्रों से बात मीडिया में फैलने के बाद आनन-फानन में हॉस्पिटल प्रशासन ने उक्त आरोपियों को छुट्टी दे दी।

आखिर क्या है पूरा मामला

सूत्रों के हवाले से मिली खबर  की पुष्टि के लिए  जब मीडियाकर्मी  फाजिल्का के सरकारी हॉस्पिटल में पहुंचे  तो वहां पर थाना खुई खेड़ा मैं कार्यरत एएसआई रविकांत  को बैठे हुए देखा जब थानेदार रविकांत से उनके लगातार 3-4 दिन से हॉस्पिटल में आने का कारण पूछा तो थानेदार की आंखों में आंसू आ गए तो उसने  मीडिया को बताया कि गोपी राम पुत्र  गनीराम राम वासी डंगर खेड़ा के बयानों के आधार पर पुलिस ने मुकदमा नंबर 119 भारतीय दंड संहिता की धारा 420 120 बी आईपीसी 13ए पब्लिक विलेज कॉमन लेंड रेगुलाईज  एक्ट के तहत दीवान चंद पुत्र रामप्रताप व उसके बेटे रामनिवास पुत्र दीवान चंद वासी डंगर खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोपियों को योग्य अदालत में पेश किया गया जहां माननीय अदालत ने उक्त आरोपियों को 1 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। रिमांड में भेजने से पहले उक्त आरोपियों को मेडिकल  चेकअप के लिए सरकारी हॉस्पिटल में लाया गया जहां पर आरोपियों के बीमार होने का कारण बताकर फाजिल्का के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। उक्त आरोपियों ने फाजिल्का के हॉस्पिटल में बने प्राइवेट 4 नंबर एसी रूम ले लिया। उक्त आरोपियों लगभग 4 पुलिसकर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात थे परंतु जब पुलिस ने देखा कि उक्त आरोपी तंदुरुस्त है तो पुलिस ने सरकारी हॉस्पिटल में डॉक्टरों से इनकी छुट्टी करने करने को कहा परंतु अस्पताल कुछ एक कर्मचारी  ने  मरीज ठीक ना होने की बात कही जिस पर पर पुलिस  को कुछ शक हुआ। इसी घटनाक्रम के बीच पुलिस को जानकारी मिली की उक्त आरोपियों की बेटी वह दूसरे आरोपी की बहन इस हॉस्पिटल में बतौर नर्स काम कर रही है ।और उक्त आरोपी भी रूहाड़ीया वाली हस्पताल में  कार्यरत है। और उक्त नर्स अपने पिता के भाई को बचाने के लिए पुलिस को चक्कर में डाले हुए हैं।  जब मीडिया द्वारा यह  मामला  सिविल सर्जन चंद्र मोहन कटारिया और एस एम औ सुधीर पाठक के ध्यान में लाया गया तो तुरंत ही सिविल सर्जन व एसएसओ अस्पताल में दाखिल उक्त आरोपियों कि फाइलें मंगवा कर जांच की गई और जांच के बाद तुरंत ही उक्त आरोपियों को सरकारी हॉस्पिटल फाजिल्का से छुट्टी दे दी गई।

पुलिस द्वारा पंजाब वार्ता के पत्रकार को वह सारे सबूत दिए हैं जिसमें किस तरह हॉस्पिटल में कार्यरत नर्स व उसके सहयोगी द्वारा सारा दिन पुलिस को किस तरह चक्कर में डाला रहा यहां तक की सिविल सर्जन फाजिल्का चंद्र मोहन कटारिया को इस मामले की सूचना मिली तो उन्हें तुरंत अपने दफ्तर में कार्यरत मोनू कुमार को उक्त आरोपियों की फाइलें लेने के लिए इमरजेंसी में भेजा तो इमरजेंसी में तैनात स्टाफ ने फाइल चेक होने के लिए गई हैं कहकर वापस भेज दिया और खुद उक्त उक्त नर्स सिविल सर्जन के पास आ गयी यह बताने के लिए उनको क्या क्या बीमारियां हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर द्वारा उक्त 1 आरोपी का अल्ट्रासाउंड करवाने  का लिखा हुआ है जो अभी हुआ नहीं है जब पत्रकार द्वारा पूछा गया कि 3 दिन हो जाने के बाद अभी तक उक्त आरोपियों का अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ आगे से जवाब मिला कि सरकारी हॉस्पिटल का अल्ट्रासाउंड अभी खराब है। पत्रकार द्वारा कहां गया कि  कोई मरीज हॉस्पिटल में भर्ती होता है उसको अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बाहर रेफर कर दिया जाता है । परंतु  उक्त मरीजों क्यों नहीं बाहर रेफर क्यों नहीं किया गया किया गया इस बात का किसी भी अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं था ।इसलिए उक्त आरोपियों को यहीं पर रखे जाना और लगभग 3 दिनों तक अल्ट्रासाउंड ना होना भी पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप कहीं ना कहीं सही होने की पुष्टि करते है ।जो उक्त मरीज मीडिया में मामला आने से पहले बुरी तरह बीमार थे परंतु खबर मीडिया में आने के बाद लगभग 30 मिनट में सही और स्वस्थ हो गए और उनको हॉस्पिटल छुट्टी दे दी गई और ना ही अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ी ना ही किसी और मेडिकल टेस्ट की इस घटना से साफ जाहिर होता है ।कि उक्त आरोपियों को बचाने के लिए हॉस्पिटल में कार्यरत उक्त नर्स का कहीं ना कहीं महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस सब के बीच एक और बात सामने निकल कर आई की उक्त दोनों आरोपियों का केरोना जांच के लिए सैंपल इकट्ठे लिए गए परंतु एक आरोपी की रिपोर्ट आ गई परंतु दूसरे की रिपोर्ट नहीं आई इस बाबत जब जानकारी ली गई तो पता चला कि दूसरे आरोपी के सैंपल में कोई दिक्कत आ गई थी इसलिए उसका दोबारा सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया गया है जिसकी रिपोर्ट आज आ जाएगी। इस मामले को लेकर जब आरोपी से पूछा गया इस नाम की महिला नर्स आपकी क्या लगती है तो उसने खुद माना कि वह उसकी बेटी है।

इस मामले में क्या कहना है उक्त महिला नर्स का।

इस मामले में जब फाजिल्का सिविल हॉस्पिटल में कार्यरत उक्त महिला नर्स ने अपने पर लगे  आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी ड्यूटी ऑपरेशन थिएटर में होती है। मेरा और किसी मामले में कोई लेना देना नहीं है।

 

 

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