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तारबंदी के अंदर खेती करते किसानों को मिलने वाली मुआवजा राशि बंद

Compensation amount paid to farmers doing agriculture under the ceilings



फाजिलका-(दलीप दत्त)-पंजाब बार्डर किसान वैलफेयर सोसायटी के प्रांतीय प्रधान रघुबीर सिंह भंगाला और जिला प्रधान सुखदेव सिंह संधू द्वारा जिला फाजिल्का के सरहदी गाँवों चक्क टाहलीवाला, गहलेवाला, लाधूका, रूपनगर, पक्का चिश्ती, मानसा, मुहार खीवा, मुहार जमशेर आदि गाँवों का दौरा किया गया। इस दौरान उन्होंने सरहदी क्षेत्र में तारबंदी से पार खेती करते किसानों की मुश्किलें सुनी। इस दौरान प्रांतीय प्रधान ने गाँव लाधूका में मीटिंग के दौरान किसानों को संबोधन करते हुए बताया तारबंदी के अंदर उनको खेती करने के लिए कम समय दिया जाता है और बी.एस.एफ द्वारा लगातार गेट नहीं खोले जाते जिस कारण किसानों को खेती करने में बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस दौरान गाँव लाधूका के कामरेड दर्शन चड्ढा ने कहा कि तारबन्दी में किसानों को 2.5 फुट से ऊँची फसल बीजने पर मनाही है जिस कारण किसान सिफ धान की फसल और गेहूँ की ही बिजाई कर पाते हैं और नहरी पानी की सुविधा न होने के कारण जमीनों की उपजाऊ शक्ति लगातार कम होती जा रही है। उन्होंने बताया कि तारबन्दी मंे पाकिस्तान से जंगली जानवर फसलों का बहुत बड़े स्तर पर नुकसान करते हैं जिस का अभी तक सरकार द्वारा कोई पक्का प्रबंध नहीं किया गया है। इस मौके प्रांतीय प्रधान ने बताया कि तारबन्दी में खेती करते किसानों को आती मुश्किलों के संबंध में पंजाब बार्डर किसान वैलफेयर सोसायटी द्वारा हाईकोर्ट में केस भी लगाया हुआ था जिसके संबंध में अदालत द्वारा एक स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाया था। उन्होंने बताया कि अदालत के दिए आदेशों के मुताबिक तारबन्दी के किसानों को मिलने वाले प्रति एकड़ दस हजार रुपए मुआवजा भी सरकार ने देना बंद कर दिया है जिस कारण पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे किसान नरक भरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। इस मौके तारबन्दी अंदर खेती करते किसानों ने बताया कि तारबन्दी के साथ लगते रास्तों से निकलने पर भी मनाही है और फसल की बिजाई और कटाई के समय उनको मशीनरी और लेबर बहुत ही महंगे रेट पर मिलती है जिस कारण उनकी फसल की समय पर बिजाई और कटाई में परेशानी आती है। इस मौके प्रांतीय प्रधान ने तारबन्दी अंदर किसानों को आ रही मुश्किलों पर माँगें मनवाने के लिए एकजुट होने की अपील की। इस मौके किसान प्रेम चंद, शाम लाल, ओम प्रकाश, लवप्रीत सिंह के अलावा अन्य किसान मौजूद थे।

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