फाजिल्का विधानसभा से हो सकता है आप पार्टी का अरोड़ा बिरादरी से जुड़े उम्मीदवार का ऐलान।

-सुखपाल खैहरा वाला मामला सामने आने के बाद आप पार्टी के पुराने वर्करों ने कहां हो सकती है अकाली दल की चाल।
– लगभग 2 महीने पहले अकाली दल छोड़कर आए उक्त व्यक्ति को अगर आम पार्टी देती है टिकट तो जिला फाजिल्का की चारों विधानसभा सीटों पर आप पार्टी के उम्मीदवारों की होगी जमानत जब्त।
– पार्टी 2017 में भुगत चुकी है ऐसे ही की गई कुछ गलतियों का खामियाजा।
फाजिल्का-(दलीप दत्त)-विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर हर पार्टी पूरे जोश में 2022 में अपनी अपनी पार्टी की सरकार बनाने का दावा पेश कर रही है परंतु इसकी सबके चलते कांग्रेस ,भाजपा, अकाली दल और आप पार्टी सहित इन सभी पार्टियों के  कुछेक ऊहदेदार पार्टी बदल रहे हैं और  चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की तिथि का ऐलान होने से लेकर वोटिंग होने तक पार्टियों में आना जाना लगा रहेगा बात करते हैं। फाजिल्का विधानसभा की जहां आज से लगभग दो-तीन महीने पहले कांग्रेस के सीनियर लीडर एव पूर्व जंगलात मंत्री रह चुके हंसराज जोसन ने कांग्रेस छोड़कर सुखबीर बादल  के नेतृत्व में अकाली दल में शामिल हुए और सुखबीर बादल ने हंस राज जोसन को पार्टी में शामिल करने के साथ ही बातों बातों में फाजिल्का  से अकाली दल का उम्मीदवार होने का लगभग -लगभग ऐलान कर दिया था।
परंतु इस ऐलान के तुरंत बाद ही अकाली दल से जुड़े एक युवा नेता जो अकाली दल की एक इकाई के प्रधान भी रह चुके हैं और फाजिल्का से अकाली दल की टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई गई परंतु अकाली दल द्वारा इस बात को सिरे से खारिज कर दिया और तो उक्त युवा नेता द्वारा दावा जताने के बाद अकाली दल फाजिल्का के लगभग सभी नेताओं ने की मीटिंग बुलाई गई और एकजुटता दिखाते हुए सभी ने ऐलान किया कि अकाली दल द्वारा किसी भी उम्मीदवार  का चयन फाजिल्का से चुनाव लड़ने के लिए किया जाएगा उसका स्वागत किया जाएगा चाहे वह हंसराज जोसन ही क्यों ना हो। इसके बाद हर छोटी बड़ी  फेरी के दौरान सुखबीर बादल के साथ रहने वाले उक्त युवा नेता ने आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेताओं के साथ नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी और 27 अप्रैल को  आम आदमी पार्टी के विधायक एव विपक्षी दल के नेता हरपाल चीमा के नेतृत्व में आम पार्टी में शामिल हो गए और उस वक्त मीडिया द्वारा अकाली दल के सीनियर लीडर अशोक अनेजा से मीडिया द्वारा अकाली दल छोड़कर उक्त युवा नेता के द्वारा आम पार्टी में शामिल होने पर जब बातचीत की गई उन्होंने कहा कि टिकट मांगने का सबको अधिकार है परंतु पार्टी ने फैसला करना है कि टिकट किस जीतने वाले उम्मीदवार को दी जाए उक्त युवा नेता अभी बच्चा है वह एमएलए का चेहरा नहीं है। परंतु आप पार्टी में शामिल होने के बाद उक्त युवा नेता द्वारा पूरे जोर-शोर से आप पार्टी का प्रचार शुरू कर दिया और जनता में कहना शुरू कर दिया कि राय सिख बिरादरी से जुड़ा होने के कारण आम पार्टी फाजिल्का के वह उम्मीदवार होंगे और अखबारों और यूट्यूब के माध्यम से हर रोज एक गांव में कई लोगों के आम पार्टी से जुड़ने की खबरें निरंतर जारी होनी शुरू हो गई। और जिस की जानकारी और खबरों की कटिंग ऊपर पार्टी को जानी शुरू हो गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसी के चलते आज से कुछ दिन पहले आम पार्टी द्वारा फाजिल्का विधानसभा से उम्मीदवार चयन के लिए एक सर्वे टीम ने सर्वे करना शुरू कर दिया और जो लोग पार्टी में आ रहे हैं और जो लोग पार्टी में उनको जोड़ रहे हैं इस सब की जानकारी के लिए कुछ गांवों में सर्वे टीम द्वारा सर्वे किया गया इससे के बीच आज से कुछ दिन पहले गांव कबूलशाह खुबन में 40 परिवारों आम आदमी पार्टी में हुए शामिल की खबरें विभिन्न विभिन्न अखबारों में प्रकाशित हुई। सूत्रों के अनुसार मीडिया में जारी हुई इस खबर को लेकर सर्वे करने आई टीम उक्त गांव में जाकर जब इसकी जानकारी एकत्र की गई तो कुछ गलत जानकारी के साथ खबर को अखबारों में सिर्फ अपनी वाहवाही लूटने के लिए प्रकाशित करवाया गया। सूत्रों के अनुसार जब टीम ने और गहराई से जांच की गई तो उनको पता चला उक्त व्यक्ति द्वारा कुछ ऐसे लोगों को पार्टी के साथ जोड़ा दिखाया गया जिनको पहले भी पहले भी आम पार्टी से जुड़ा दिखाया गया था।
-एक खबर ने खोली पूरी पोल, उल्टी पड़ गई चाल।
 खबर का हेडिंग,
गांव कबूलशाह खुबन से  सबका सरपंच नथा राम सहित 40 परिवार आम पार्टी के युवा नेता के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी में शामिल।
इस प्रकाशित खबर में नथारम को गांव कबूलशाह खुबन का पूर्व सरपंच बताया गया है उक्त नथाराम आज से 10-15 साल पहले भारतीय जनता पार्टी की तरफ से पंच रह चुका है। और वह एक दिहाड़ी दार आदमी है। इस बाबत जब कबूल शाह खुबन  गांव के कुछ लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मीडिया में रहने के लिए ऐसी खबरें प्रकाशित होती रहती हैं। गांव में ही वर्कशॉप पर काम करने वाले एक व्यक्ति ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि की हम से यह तक कह दिया गया था कि अगर मुझे आम आदमी पार्टी से टिकट मिलती है तो आप  वोट डालना अगर मुझे टिकट ना मिले तो आप अकाली दल को वोट दें दीजिएगा।
इसके बाद सर्वे टीम द्वारा जब राय सिख बिरादरी से जुड़े अन्य गांवों में और शहर के मेहरिया बाजार होटल बाजार और शहर के कई वार्डों में लोगों से बातचीत की गई तो लोगों द्वारा अबोहर का उदाहरण दिया गया कि अबोहर में आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार नहीं जीत पाया था परंतु कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार की हार का कारण बना ऐसे में अगर आम आदमी पार्टी राय सिख बिरादरी को टिकट दे देती है और कांग्रेस द्वारा 2017 में फाजिल्का से देवेंद्र सिंह घुबाया राय सिख बिरादरी से जुड़े हुए हैं और इस वक्त वो फाजिल्का से कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार हैं। राय सिख बिरादरी अगर दो भागों में बंट जाती है तो तीसरे पक्ष की जीत निश्चित है वो अकाली दल या भाजपा का प्रत्याशी हो सकता है। ऐसे में आम आदमी पार्टी अरोड़ा बिरादरी से ही उम्मीदवार का चयन कर सकती है। और तो और लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि हो सकता है कि अकाली दल की यह है कि चाल हो क्योंकि कुछ महीने पहले ही पंजाब में संपन्न हुए नगर परिषद और नगर कौंसिल के चुनावों में अकाली दल के सुप्रीमो सुखबीर बादल के साथ द्वारा हर वार्डों में वोट मांगे गए और उस वक्त उक्त युवा नेता ने साथ ही रह कर वोट मांगे थे और फाजिल्का वासियों ने अकाली दल पर भरोसा नहीं जताया जिसके चलते अकाली दल को एक भी सीट से जीत हासिल नहीं हुई। ऐसे में अकाली दल के सुप्रीमो के खुद वार्ड -वार्ड में जाकर वोट मांगने पर भी लोगों ने वोट नहीं दी और अकाली दल के साथ जुड़े उक्त युवा नेता द्वारा पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में आने के बाद उसके कहने पर लोग कैसे इतनी जल्दी आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ने पर केसे रजामंद हो गए।क्योंकि सुखपाल खैहरा वाला मामला आम आदमी पार्टी के सामने ही हाल ही में घटा है। 
इसलिए पार्टी को गहराई से जांच करनी होगी कहीं ज्यादा के चक्कर में पिछला ही ना लुटा कर बैठ जाएं।
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