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फिरोजपुर सीट पर मतदान समाप्त, सुखबीर सिंह बादल रहे विजयी

फाजिल्का-(दलीप दत्त)-पंजाब की फिरोजपुर संसदीय सीट पर 19 मई को वोट डाले गए। यहां के मतदाता सातवें और आखिरी चरण की वोटिंग के तहत अपने वोट का इस्तेमाल किया। फिरोजपुर में 22 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे थे।

शिरोमणि अकाली दल की ओर से यहां पर राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल मैदान में थे। कांग्रेस की ओर से शेर सिंह घुबाया को टिकट मिला था जबकि आम आदमी पार्टी ने हरजिंदर सिंह काका मैदान में थे।

इस सीट पर 1998 से अकाली दल के सीनियर नेता जोरा सिंह मान 3 बार लोकसभा चुनाव जीते थे । इसके बाद 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर अकाली दल के शेर सिंह घुबाया विजयी रहे। दरअसल, बीते 25 साल से अकाली दल के कब्जे में रही इस सीट को बचाना उसके लिए प्रतिष्ठा की बात थी।

2014 में क्या थे नतीजे
2014 लोकसभा चुनाव में शेर सिंह घुबाया ने करीबी मुकाबले में सुनील जाखड़ को हराया। शेर सिंह घुबाया को 4,87,932 वोट मिले जबकि पार्टी के कांग्रेस अध्‍यक्ष रहे सुनील जाखड़ को 4,56, 512 वोट मिले। यानि सुनील जाखड़ को करीब 31,420 वोट से हार मिली। इससे पहले 2009 लोकसभा में घुबाया ने जगमीत सिंह बरां को शिकस्‍त दी। सुखबीर बादल व घुबाया के बीच सीधा मुकाबला
फाजिल्का । पाकिस्तान की सीमा से सटे लोकसभा क्षेत्र फिरोजपुर में मुख्य मुकाबला अकाली दल और कांग्रेस में थे। अकाली दल पार्टी अध्यक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल मैदान में थे। उन्हें टक्कर दे रहे हैं अकाली दल से दो माह पहले ही कांग्रेस में गए मौजूदा सांसद शेर सिंह घुबाया। घुबाया ने सुखबीर से ही राजनीति के दावपेंच सीखे थे और इस बार उन्होंने अपने ही गुरु को पसीना बहाने पर मजबूर कर दिया। जिस समुदाय ‘राय बिरादरी’ से घुबाया आते हैं, उसका क्षेत्र में प्रभाव ज्यादा है। अकाली दल राय सिख बिरादरी को अपने पक्ष में करने के लिए जोड़तोड़ का खेल खेल रहा था। राय सिख बिरादरी के लोगों को व्यक्ति विशेष की तरफ देखने के बजाय पार्टी के साथ जुड़े रहने के तर्क दिए जा रहे थे।

अबोहर में भी थी कांटे की टक्कर
बड़े शहरों में अबोहर को छोड़कर फाजिल्का, फिरोजपुर, जलालाबाद, मुक्तसर आदि में शिरोमणि अकाली दल के गढ़ को भेदना कांग्रेस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। अबोहर में भी कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल में कांटे की टक्कर थी । कांग्रेस प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ के अपने ही क्षेत्र में पार्टी की स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। कांग्रेस के लोग ही अंदरखाते विरोध कर रहे थे । शायद विधानसभा चुनाव में जाखड़ भी इसी वजह से हारे थे। फाजिल्का से विधायक दविंदर सिंह घुबाया जो कि कांग्रेस प्रत्याशी घुबाया के बेटे हैं, उनको छोड़कर क्षेत्र के लगभग सभी विधायक और पूर्व विधायक घुबाया के विरोध में थे ।

राय सिख का फैक्टर
जलालाबाद और अबोहर व फाजिल्का में राय सिखों की संख्या ज्यादा है। यह बिरादरी जिस किसी के भी पक्ष में चलती है, तो इकट्ठी ही चलती है। बिरादरी के बहुत कम लोग ऐसे हैं जो समुदाय से छिटक कर दूसरी जगह पर वोट करें। हालांकि, यदि मत प्रतिशत देखें तो यह बिरादरी सिर्फ साढ़े बाइस फीसद था, जबकि हिंदुओं व सिखों के वोट ज्यादा था। क्षेत्र में साढ़े चौबीस फीसद जट सिख, पैंतीस प्रतिशत हिंदु अरोड़वंशी और अठारह प्रतिशत कंबोज बिरादरी के वोट थे। अरोड़वंशी समाज के साथ-साथ बाबरिया समाज भी अपनी अहम भूमिका निभाता है। हिंदु अरोड़ वंशियों के करीब चार लाख वोट हैं। बाबरिया समाज के भी करीब एक लाख वोट थी।

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